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Category (जुलार्इ 2015)


  • मेवाड-धरा महिमा
    मेवाड-धरा महिमा
    भगवान लाल शर्मा "प्रेमी" उदयपुर (राज.)

    मेवाड कुलभूषण-स्वाधीनता के पुजारी प्रातः स्मरणीय, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की ४७३ वीं जयन्ती ११-६-२०१३ पर मेवाड की गुणगाथा का बखान

    चितौड धधकता अंगारा।
    दुश्मन भी हमेशा है हारा।ा
    चूण्डा का त्याग रहा न्यारा।
    जौहर ज्वाला जग उजियारा।।....
    मेवाडी धरती शूरों की।
    यह सन्तो और महावीरों की।।
    यह राणा पूंजा तीरों की।
    राणा प्रताप से वीरों की।।...
    जौहर की ज्वाला जलती है।
    वहाँ सुन्दर कलिया खिलती है।।
    सतीत्व बचानें के कारण।
    जौहर में जिन्दा जलती है।।...
    मीणा जाति का मान यहाँ।
    जो राजतिलम करे राणा का।
    है क्षत्रीयोचित सम्मान यहाँ।।...
    गौरा बादल और कुम्भा की।
    यह वीर बहादुर सांगा की।।
    यह उदयसिह महाराणा की।
    यह भामाशाह महादानी की।।...
    हारित ॠषि की शान यहांॅ।
    जहाँ मर्यादा...
  • मैं दोषों का हिमगिरि बनकर आया हॅूं द्वारे
    नरेश मेहता, अमला

    मैं नतमस्तक गुरु चरणों में, गुरु मेरा भगवन
    चाहे जग कितना ही मोहे, भ्रम में मत आना।
    यह जग कांटो की बाडी है मग भी दुर्गम है
    तन, मन, धन का मोह अडिग है, ये सब दुश्मन हैं
    तुम पर मैं आश्रित हँू गुरुवर शरण तुम्हारी हूँ
    तुम मत बिसराना
    मैं दोषों का हिमगिरि बनकर आया हूँ द्वारे
    मेरे भाग्य, दया पर तेरी, तुझपर ही वारे
    तू ही पालक, रक्षक तू ही, तू ही पिता-मात-बंधु
    तेरी दया और न कुछ चाहूँ सद्गुरु वर देना
    तुम आनन्द के धाम हो गुरुवर 'धार' बसे आकर
    श्रीलालजी पंड्याजी को अपना करना था चाकर
    धन्य आपकी लीला, सच ही धन्य 'साहब' का...