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Category (जुलार्इ 2015)


  • औदीच्य समाज ही नहीं राष्ट्र के गौरव
    डॅा. रायबहादुर पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा 
    जन्म-तत्कालीन सिरोही राज्य अंतर्गत "रोहिडा" ग्राम में संवत् १८२० भाद्रपद शुक्ल द्वितीया तद्नुसार १४ सितम्बर १८६३ 
    पिता- हीराचन्द पीताम्बरजी ओझा
    भार्इ-नन्दरामजी, भूरारामजी व ओंकारलालजी
    संपादक अपनी कलम की जादुर्इ शक्ति का प्रयोग पाठक के अन्तर्मन के उद्बोधन के लिए करता है। वह जाग्रत समाज की स्थापना करना चाहता है...
  • चि. असीम के विवाह में अनुकरणीय उदाहरण
    श्री उल्लास ठक्कर इन्दौर एवं प्रफुल्ल ठक्कर, उज्जैन ने श्री वीरेन्द्र दवे अहमदाबाद (गांधीनगर) से निवेदन किया था कि वे अपने पुत्र चि. असीम के विवाह में पेरावनी सिर्फ मामा पक्ष की स्वीकार कर समाज में उदाहरण प्रस्तुत करें। श्री दवे ने इस सुझाव को सहर्ष स्वीकार कर तत्काल अपने संबंधियों को वाट्सअप पर सूचना देते हुए निवेदन किया कि चि. असीम के विवाह में पेरावनी केवल मामा पक्ष की स्वीकार की जाएगी। सभी संबंधियों एवं समाजजन ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए दवेजी को बधार्इ दी। 'औदीच्य बंधु' इस प्रकार के विचार और संकल्प के लिए श्री ठक्करद्वय...