सामूहिक विवाह व यज्ञोपवीत कार्यक्रम

गुजराती ब्राह्म्ण समाज समिति राजस्थान के तत्वावधान में जयपुर के आदर्श

नगर स्थित सेवा सदन के प्रांगण में पांच जोडों का विवाह एवं १६ बटुकों का

यज्ञोपवीत संस्कार हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।

वर्तमान में वैवाहिक

आयोजनों में होने वाले भारी खर्च पर नियंत्रण को दृष्टिगत रखते हुए समाज की

ओर से सामूहिक विवाहोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें करौली, भीलवाडा, कोटा,

नैनवा व मध्यप्रदेश के शाजापुर से पंचद्रविड समाज के औदीच्य, नागर,

प्रश्नोरा एवं मोड ब्राह्म्णों के पांच जोडों ने पूर्ण विधि विधान एवं

वैदिक रीति से दाम्पत्य सूत्र में बन्धकर समाज के प्रबुद्धजन के आशीर्वाद

के साथ नवजीवन की शुरुवात की। प्रत्येक पक्ष से मात्र ३१००० रूपये तथा

प्रति बटुक ३५०० रूपये का योगदान लिया गया। गुजराती ब्राह्म्ण समाज समिति

के इस प्रथम प्रयास में राजस्थान के सभी संभागों से पधारे समाज के बाल,

युवा एवं वयोवृद्ध लोगों नें भारी संख्या में उपस्थिति देकर उत्साहवर्द्धन

किया।

कार्यक्रम के आयोजन में समाज के अध्यक्ष श्री मनोज भार्इ दवे,

उपाध्यक्ष श्री राकेश भट्ट, सचिव श्री भारत ूषण दवे, विवाह समिति संयोजक

श्री गोपीवल्लभ तिवाडी, श्री श्यामसुन्दर तिवारी, समस्त पदाधिकारीगण श्री

सुशील कुमार शर्मा, श्री चन्द्रशेखर जोशी, श्री सत्येन्द्र शर्मा, श्री

नटवर व्यास, श्री लक्ष्मीनारायण शर्मा, योगेश व्यास, ज्योतिषाचार्य श्री

अजय शर्मा, श्री राजेश भट्ट, श्री प्रूलाल पुण्डरीक, श्री मुकेश शर्मा, डा०

शशि ूषण दवे, श्री परमेश्वर शर्मा, श्री अभय तिवाड.ी, मधुकर पण्ड्या व

कोटा के श्री अजीत कुमार शर्मा, श्री विजय कुमार जोशी व श्री गिरधारी लाल

व्यास ने आगन्तुकों का स्वागत किया।

समाज के इस सफल आयोजन का श्रेय

समाज के विभिन्न घटकों यथा औदीच्य, नागर, औदम्बर, प्रश्नोरा, त्रिवेदी

मेवाडा, मौड आदि बन्धुओं के तन, मन और धन द्वारा दिये गये सहयोग को जाता

है। सहयोग स्वरूप तीन लाख रूपये प्रदान करने वाले कार्यक्रम के मुख्य यजमान

व संयोजक विवाह समिति श्री गोपीवल्लभ तिवाडी के साथ-साथ पदाधिकारियों,

कार्यकर्ताओं व वरिष्ठजनों का श्री नाथद्वारा से पधारे श्री शशिकान्त जी

एवं उनकी धर्मपत्नी की ओर से उपरना पहनाकर स्वागत किया गया। बाहर से आये

सभी आगन्तुक बन्धुओं ने कार्यक्रम की विभिन्न व्यस्थाओं की ूरी ूरी

प्रशन्सा की।

सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु के संकल्प को लेकर गत तीन माह के

अथक प्रयास की सफल परिणति ६ जून शनिवार को सम्पन्न १६ बालकों के उपनयन

संस्कार तथा ५ जोडों के विवाह संस्कार से हुर्इ। उपनयन संस्कार हेतु १३

बटुकों का रजिस्ट्रेशन किया गया था तथा ३ को विवाह पूर्व यज्ञोपवीत घारण

करवार्इ गर्इ। गुजराती ब्राह्म्ण समाज के इस सामूहिक प्रसंग में राज्य के

विभिन्न जिलों से ज्ञाति बन्धु उत्साह के साथ सम्मिलित हुए तथा यथा शक्ति

तन, मन और धन से सहयोग किया। सामुहिक विवाह एवं यज्ञोपवीत समारोह की पूर्व

संध्या पर ४ बजे से ही शहर के बाहर बटुकों एवं वर-वधुओं के परिवारों का आना

आरम्भ हो गया था तथा पंजीयन स्थल पर अपने आवास स्थल की जानकारी प्राप्त कर

अपना अपना सामान व्यवस्थित कर चाय पान का रसास्वादन किया। सायं ७ बजे से

गणपति स्थापन का कार्य प्रारम्भ किया गया जिसके पश्चात समाज की बालिकाओं

एवं महिलाओं द्वारा नृत्य एवं संगीत का पारम्परिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया

गया। इसी बीच ढोल के साथ महिलाएं कुम्हार के यहां जाकर बासन लेकर आर्इं।

भोजन में पारम्परिक लाप्सी, भात एवं मूंग का रसास्वादन करने के पश्चात सभी

वर वधु व बटुक पक्षों ने अपनी अपनी परम्परानुसार रतजगा के मधुर गीतों से

सम्पूर्ण वातावरण को उत्सवमय कर दिया। अगले दिन ६ जून ९ बजे सभी को पोहे,

पकौडी व जलेबी का नाश्ता करवाया गया। इसी दौरान मुख्य आचार्य पण्डित कृष्ण

गोपाल शुक्ल एवं पण्डित पुरुषोत्तम लाल शुक्ला व उनके सहयोगी पण्डितों ने

मुख्य यज्ञ वेदी व बटुकों के लिये वेदियां बनाकर ग्रहशान्ति का कार्य मुख्य

यजमान श्री गोपीवल्लभ तिवाडी व उनकी पत्नी श्रीमती जयश्री देवी से

प्रारम्भ करवाया। मुख्य यज्ञ के पश्चात मुण्डित-अमुण्डित बटुकों को उपनवीत

करने की संस्कार विधि प्रारम्भ की गर्इ। सोलह बटुकों को एक साथ उनके आगे

बनी वेदियों के पीछे आसन पर रेशम का पीताम्बर पहन दण्ड हाथ में लिये बैठा

देखना अपने आप में एक अनोखा दृश्य था। अपने अपने गुरु से मंत्र प्राप्त कर

जनेउ धारण कर विद्याघ्यन हेतु भिक्षा प्राप्त कर भागना और मामा द्वारा उनको

पकड कर लाना आदि क्रियाओं का समस्त उपस्थित ज्ञाति बन्धुओं ने आनन्द लिया।

पूर्णाहुति के पश्चात समाज समिति की ओर से लाए गये वस्त्रों को वर व वधुओं

के माता पिताओं को मामा द्वारा ओढाकर माहेरा कार्य सम्पन्न किया गया। इस

कार्यक्रम की सबसे उत्तम बात यह थी कि सभी बटुकों को समाज के वरिष्ठ जनों

का आशीर्वाद मिला। ब्यावर निवासी श्री रामचन्द्र जी शर्मा ने आशीर्वाद

स्वरूप प्रत्येक बटुक को विशेष रूप से बनवाया हुआ चान्दी का एक-एक सिक्का

यादगार हेतु प्रदान किया।

भोजन के पश्चात पाँचों दुल्हों को सायं ५ बजे

तक वर निकासी हेतु तैयार होने के लिये कहा गया। पाचों दुल्हों के लिये

समिति की ओर से एक समान सूट, साफा, कलंगी, जूते व मोजे तैयार करवाए गये थे।

दुल्हनों के लिये जोधपुर निवासी एवं वर्तमान में समिति के संयुक्त सचिव

श्री चन्द्रशेखर जोशी की माता श्रीमती आशा देवी पत्नी स्व० मुरलीधर जी जोशी

की ओर से प्रदत्त एक जैसा बेश व समिति द्वारा प्रदत्त घाटडी, मांग टीका,

नथ, बाली, चुटकी पहन श्रृंगारित हो तैयार रहने हेतु कहा गया। गाजे बाजे व

आतिशबाजी के साथ घोडी चढ दूल्हों की बारात नाचते गाते विवाह मंडप तक पहुंची

जहां प्रत्येक मंडप के द्वार पर तोरण लटके थे। हर एक दुल्हा अपने

निर्धारित तोरण के आगे घोडी पर आ खडा हुआ और फिर सबने एक साथ तोरण क्रिया

पूरी की, उसके पश्चात सभी वर एक साथ स्टेज पर आये जहां उनकी दुल्हनों ने वर

माला डालकर एक दूसरे का वरण किया। मुहूर्त के अनुसार गोधुली वेला में सभी

वर अपने अपने मण्डप में आकर बैठे और आचार्य ने मंत्रोारण के साथ विवाह विधि

आरम्भ की। आचार्य के निर्देशानुसार मण्डपों में उपस्थित पण्डित कन्या के

माता-पिता व वर से पूजन आदि करवाते रहे। बुलवाने पर मामा वधुओं को गोद में

उठाकर लाए। कन्यादान के पश्चात वैदिक रीति से पाणिग्रहण संस्कार सम्पन्न

हुआ। कन्यादान के रूप में समाज के प्रतिष्ठित बन्धुओं ने उपहार स्वरूप

दैनिक उपयोग की वस्तुएं प्रदान की।

वर-वधुओं व बटुकों को आशीर्वाद

प्रदान करने के लिये समाज के प्रतिभाजन्य विधिवेत्ता एवं बीजेपी के प्रदेश

प्रवक्ता श्री कैलाशनाथ भट्ट एवं वयोवृद्ध व सम्माननीय बन्धुजन उपस्थित हुए

जिनमें श्रीमान दुर्गााशंकर व्यास, श्री घनश्याम धर त्रिपाठी (पूर्व

अध्यक्ष), श्री सम्पतलाल जोशी, श्री नृसिग लाल भट्ट, श्री उमा कैलाशपति

ठाकर, श्रीमती राजेश्वरी भट्ट, श्री भोलाशंकर शुक्ल, श्री विश्वनाथ भट्ट,

डा० सुनील शर्मा, श्री राधेश्याम नागर, श्री उमाशंकर नागर, श्री महेन्द्र

कुमार नागर, श्री रतनशंकर गौतम, श्री महेन्द्र कुमार गौतम, श्री केशव भट्ट,

श्री दिनेश तिवाडी (पूर्व सचिव), श्री प्रेमशंकर व्यास, श्री विनायक

शर्मा, राजकोट गुजरात से श्री कमलेश भार्इ शर्मा, कोटा से श्री रमेश जोशी

(औदीच्य गौरव), श्री शिवशंकर व्यास (औदीच्य बन्धु), श्री ओ पी शुक्ला,

श्रीमती उर्मिला शर्मा, श्री अशोक शुक्ला, नांवां से श्री राधेश्याम जोशी,

कुचामनसिटी से श्री रामस्वरूप शर्मा, श्री हरीश आचार्य, झालावाड से श्री

सुरेश शुक्ला, टौंक से श्री शिव प्रसाद शर्मा, डा० विष्णु शर्मा, निवार्इ

से श्री राधामोहन भट्ट, भीलवाडा से श्री हर्ष शर्मा, पीपलूंद से श्री गिररज

पुण्डरीक, शाहपुरा से श्री दुर्गाशंकर जी, अजमेर से श्री गाोपाल शर्मा,

श्री कमल कुमार जोशी, जोधपुर से श्री सत्यनारायण जोशी, श्री सतीश औदीच्य,

उदयपुर से श्री सी ची उपाध्याय, श्री श्रवण शर्मा, टोडारायसिग से श्री

दुर्गाशंकर शुक्ला आदि की उपस्थिति प्रेरणादायक एवं उत्साह वर्द्धक रही।
सम्पूर्ण

प्रसंग में आरम्भ से लेकर अन्त तक आवास, टेन्ट, सफार्इ, बैण्ड, घोडी आदि

की व्यवस्थाओं के समय साधन का कार्यभार समाज सेवक श्रीमान अभय कुमार जी

तिवाडी ने बहुत ही जिम्मेदारी के साथ निभाया। इसी प्रकार कोटा के श्रीमान

विजय कुमार जोशी के पूर्व अनुभवों का लाभ समाज को न केवल प्राप्त हुआ बल्कि

उन्होने दोनों दिवस संचालन एवं प्रबन्धन के कार्य में पूर्ण मनोयोग से

जुटकर सहयोग किया। कार्य का उत्साह उन अनोखे क्षणों से भी प्रदर्शित होता

है जब बे भी परोसगारी करने में आगे रहे परन्तु अन्तिम पंगत में वालन्टियर्स

की कमी देख वयोवृद्ध कार्यकर्ता श्रीमान सम्पतलाल जोशी भी अपने आप को नही

रोक सके। यही उत्साह व अपनापन किसी भी कार्यक्रम की सफलता का चरम होता है।
प्रस्तुतिः योगेश व्यास







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