डॅा. श्रीमाली, पवन जैन एवं सुषमा व्यास का सम्मान

हिन्दी साहित्य सम्मेलन के मालवी मनवार में
डॅा. श्रीमाली, पवन जैन एवं सुषमा व्यास का सम्मान

उज्जैन। अभावों की अग्नि में तपकर कुंदन बने मालवी के उन्नायक डॅा. चिन्तामणि

उपाध्याय की जयन्ती हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा भारतीय ज्ञानपीठ में

पुष्पांजलि, काव्यांजलि एवं उनके संस्मरणों और विद्वानों के सम्मान के साथ

सम्पन्न हुर्इ। मुख्य अतिथि पूज्य विनोबा के शिष्य आचार्यकुल के राष्ट्रीय

अध्यक्ष डॅा. हीरालाल श्रीमाली थे। अध्यक्षता सम्मेलन के प्रांतीय

कार्यकारी अध्यक्ष आनन्द मंगलसिह कुलश्रेष्ठ ने की।

डॅा. उपाध्याय

स्मृति सम्मान डॅा. श्रीमाली को, समर्थ सेवा सम्मान बदनावर के लेखक श्री

पवन जैन को एवं श्रीमती मथुरादेवी वट स्मृति सम्मान लोकगीत गायिका श्रीमती

सुषमा व्यास को श्री कुलश्रेष्ठ, डॅा. रत्ना कुशवाह, श्री राधेश्याम दुबे,

डॅा. माहेश्वरी एवं श्री वाघवा द्वारा भेंट किया गया। २४-६-१५ डॅा.

श्रीमाली ने अपने उद्बोधन में कहा कि निःस्वार्थ सेवा ही किसी समाज अथवा

राष्ट्र की द्टढताका आधार है, जिसका वर्तमान में अभाव है। डॅा. उपाध्याय की

जयन्ती मालवी मनवार के रुप में मनाना संस्कारवान समाज बनाने का एक प्रयोग

है। शिक्षक राष्ट्र की भावी पीढी को संस्कारित करें तो यह सहज संभव होगा।

अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलश्रेष्ठ ने कहा कि साहित्य समाज व राष्ट्र को

दिशा दिखाता है और दादा चिन्तामणि जैसे मार्गदर्शक के रूप में मिलें हो तो

लोहा भी पारस बन जाता है। कुशल संगठक उपाध्याय जी ने व्यक्तिगत लेखन भले कम

किया पर संगठन की उनमें अद्भुत क्षमता थी। छात्रों एवं साहित्यकारों की

दिशा भी बदल देने में माहिर डॅा. उपाध्याय मालवी कवियों की तीन पीिढयों के

निर्माता थे। डॅा. रत्ना कुशवाह ने निकोबारी लोकगीतों से श्रीमती सुषमा

व्यास ,श्रीमती उषा रायकवार एवं श्रीमती निधि शर्मा ने मालवी लोकगीतों से

समा बांध दिया। मालवी काव्यांजलि में सर्वरी अमितोष माथुर, गोपाल कावलिया

(दोनों बदनावर), ॠषभ जैन, ज्वलंत शर्मा महिदपुर, मंगलेश जायसवाल

(कालापीपल) के साथ नगर के रचनाकारों ने श्रद्धासुमन अर्पित किये।

इस अवसर

पर साहित्यकारों के साथ साहित्य प्रेमियों एवं दादा के परिजनों ने

पुष्पांजलि अर्पित की। अतिथि परिचय श्री हरिहर शर्मा ने दिया। संचालन कवि

श्री राजेश रावल 'सुशील' ने किया तथा आभार डॅा. राधेश्याम शर्मा 'प्रतीक'

ने माना। निशिकांत व्यास उज्जैन


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