एकोहं बहुस्याम् - विप्र वंश विन्यास

एकोअहं बहुस्याम, बहुस्याम एकोअहं। अर्थात् मैं एक हूँ और अनेक बनूं, मैं अनेक हूँ फिर भी एक ही हूँ। वृहदारण्यक उपनिषद् की इसी भावना को हमारा ब्राह्म्ण समुदाय सदैव स्वीकार करता आया है। प्रस्तुत पुस्तक एकोहं बहुस्याम् : विप्र वंश विन्यास "ब्रीफ हिस्टरी अॅाफ ब्राम्हिन सब कास्ट्स" में कतिपय ब्राह्म्ण उपजातियों की ऐतिहासिक जानकारी दी गर्इ है। विमोचन महंत रासबिहारी शरणजी, स्वामी गीतानन्दजी महाराज एवं उदयपुर के मेयर औदीच्य रत्न पं. लोकेश द्विवेदी द्वारा दिनांक १९ अप्रैल को धर्मशाला में किया गया। पुस्तक में पालीवाल, नागदा, औदीच्य, मेनारिया, सुखवाल, पारीक, गोड, मोड, गुर्जरगौड, श्रीमाली इत्यादि ४० ब्राह्म्ण उपजातियों का संक्षिप्त इतिहास संकलित किया गया है। पुस्तक सर्व ब्राह्म्ण बंधुओं के लिए उपयोगी बनी रहे, इस निमित्त इसमें सोलह संस्कार, स्वस्ति वाचन, श्रावणी कर्म, यज्ञोपवीत, शिखा, तिलक, गोत्र-विचार जैसे उपयोगी विषय भी सम्मिलित किए गए हैं। आशा है वर्तमान व आने वाली पीढी इस पुस्तक से लाभान्वित हो सकेगी। इसका प्रकाशन भगवान श्री परशुराम सर्वब्रह्म् समाज समिति, राजस्थान, उदयपुर द्वारा किया जाकर रियायती मूल्य १५० रु. रखा गया है।
पुस्तक प्राप्ति हेतु सम्पर्क : विनोदबिहारी याज्ञिक
२-क-५९, सेक्टर-५, गायत्री नगर, उदयपुर - मोबाइल ९४६०५-१३०६५

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