ग्रीष्म में स्वास्थ्य रक्षा

ग्रीष्म ॠतु में सूरज की प्रचंड किरणें हर इन्सान को झुलसा देती हैं। गर्मी में स्वास्थ्य रक्षा हेतु निम्नांकित सावधानियाँ रखी जाएँ तो समस्या से बचा जा सकता है।
प्रतिदिन कम से कम १५ ग्लास जल का सेवन करना चाहिए।
दिन में धूप से बचने के लिए सिर पर टोपी, केप, या सफेद कपडा बांधे।
तरबूज, खरबूज जैसे ठंडे फलों व ककडी तथा नींबू की शिकंजी का सेवन करें।
सबसे उत्तम प्याज है जिसमें र्इलीलियम नाम का द्रव्य होता है जो प्रतिरोधक क्षमता बढाता है, ठंडा रहता है। प्याज खायें भी और जेब में भी रखें।
सत्तू का उपयोग करते आ रहे हमारे पूर्वजों ने आयुर्वेद के माध्यम से बताया कि वह उत्तम व आसानी से पचने वाला प्रोटीन गर्मी में उपयोगी है।
बाजार के पेय पदार्थों के बजाय नींबू का शर्बत एवं पतले दही की लस्सी ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक है।
धूप से आकर एकदम ठंडी वस्तु न खायें। एकदम कूलर में न बैठें।
बचें में अतिसार (डायरिया) बहुत सामान्य रोग है। गर्मी में उन्हें शुद्ध, पौष्टिक हल्का भोजन एवं घर के पेय पदार्थ दें।
आयुर्वेद की एक कहावत का अर्थ है-सुबह का पानी दोपहर की छाछ एवं रात्रि में दूध अमृत समान है। इन्हें इसी क्रम में सेवन करें और आगामी लगभग तीन माह गर्मी में सावधानी रखें-स्वस्थ रहे। मस्त रहें।
-डॅा. सुनील ठक्कर, खंडवा

Search