अ.भा. औदीच्य महासभाकार्यकारिणी की बैठक सम्पन्न

अ.भा.औदीच्य महासभा केन्द्रीय कार्यकारिणी की बैठक १९ अप्रैल को भीलवाडा (राज.) में सम्पन्न हुर्इ। सर्वप्रथम सर्वश्री रघुनन्दन शर्मा, अध्यक्ष अ.भा.औदीच्य महासभा, उदयसिह पण्ड्या, कार्यवाहक अध्यक्ष अ.भा.औदीच्य महासभा, दुर्गाशंकर व्यास, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, भगवानसिह शर्मा, संगठन मंत्री, हेमशंकर दीक्षित अध्यक्ष, राजस्थान प्रान्त,विनोद चन्द्र व्यास महामंत्री राजस्थान प्रान्त, प्रमोद मेहता अध्यक्ष औदीच्य समाज भीलवाडा, जगदीश गुजराती अध्यक्ष आयोजन समिति, नीरज ओझा, अध्यक्ष स्वागत समिति ने श्री गोविन्द माधव का पूजन अर्चन कर माल्यार्पण किया। प्रारम्भिक संचालन श्री व्ही.सी.व्यास, महामंत्री राजस्थान प्रान्त द्वारा किया गया।
राजस्थान प्रान्त के अध्यक्ष श्री हेमशंकर दीक्षित ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि हमारे लिए यह गौरव की बात है कि राजस्थान प्रान्त को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित करने का अवसर प्रदान किया, जिसके लिए हम आभारी है। आपने राजस्थान में महासभा की गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्ष २०१० से महासभा की प्रान्तीय इकार्इ सक्रिय होकर सामूहिक आयोजन जैसे सामूहिक विवाह, परिचय सम्मलेन, यज्ञोपवित, गोविन्द माधव जयन्ती आदि कर रही है। राजस्थान प्रान्त की जनगणना करने का संकल्प लेकर संयोजक का दायित्व श्री विनोदबिहारी याज्ञिक को दिया गया है। आपने कहा कि ११ जनवरी को उज्जैन में हुर्इ घटना को विस्मृत करते हुए महासभा की गरिमा स्थापित रखी जाने का संकल्प लिया। आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री जगदीश गुजराती ने कहा कि मीराबार्इ एवं राणा प्रताप की भूमि पर आप सबका स्वागत करते हुए हम गौरवान्वित हैं।

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के संचालक संगठन मंत्री श्री भगवानसिह शर्मा ने कहा कि अब बैठक में कार्यकारिणी के सदस्य ही चर्चा हेतु उपस्थित रहेंगे। एजेण्डे में उल्लेखित बिन्दुओं पर क्रमवार चर्चा की गर्इ। पिछली बैठक की कार्यवाही की जानकारी के साथ महासभा के सदस्यता अभियान तथा अन्य विषयों पर भी विस्तृत रूप से चर्चा की गर्इ।

श्री उदयसिह पण्ड्या, कार्यवाहक अध्यक्ष अ.भा. औदीच्य महासभा ने अपने उद्बोधन में कहा कि महासभा अध्यक्ष श्री रघु नन्दन जी शर्मा के कार्याकल में हुआ महासभा का विकेन्द्री करण प्रशंसनीय है। हमें परिवार की तरह ही समाजसेवा में तत्पर रहना चाहिए। ११ जनवरी २०१५ को उज्जैन में आयोजित साधारण सभा की बैठक से संबंध में कहा कि मध्यप्रदेश के लोग शालीन एवं सूझबूझवाले होकर महासभा के काम को आगे बढाएँगे। राजस्थान प्रान्त में की जा रही गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए आपने कहा कि इनकी कार्यशैली से सबको सबक लेना चाहिए। अन्य प्रान्तों जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, जम्मू काश्मीर आदि प्रान्तों में महासभा के कार्य को बढाना चाहिए। महासभा की बैैठक देश के सभी क्षेत्रों मे अलगअलग समय पर होते रहना चाहिए। महासभा चुनाव संबंधी प्रक्रिया पर भी गहरार्इ से विचार करना आवश्यक है। अध्यक्ष बनने की महत्वाकांक्षा को त्यागना होगा तभी महासभा को गति मिलेगी। हम औदीच्य बंधु में प्रकाशित हो रही पिछली महासभाओं की कार्यवाही को पढें जिससे ज्ञात होगा कि महासभा के अधिवेशन कितने गरिमामय होकर उनमें ठोस निर्णय लिये जाते थे। आपने रघुनन्दनजी से निवेदन किया कि वे अभी हमारा मार्गदर्शन करें। मैंने स्वयं पूर्व अध्यक्ष श्री ज्ञानी एवं स्व. श्री रामचन्द्र जी पाण्डेय के समय जन आवाज होते हुए भी दो बार अध्यक्ष बनने का अवसर छोडा है। हमें बस समर्पित भाव से महासभा की गतिविधियों को बढाना चाहिए।

श्री दुर्गाशंकर जी व्यास, वरिष्ठतम उपाध्यक्ष अ.भा. औदीच्य महासभा जयपुर ने अपने उद्बोधन में ११ जनवरी २०१५ को उज्जैन की साधारण सभा में हुर्इ घटना पर कहा कि मैंने औदीच्य बन्धु के माह फरवरी, मार्च के अंक में अपने विचार प्रकट किए हैं। महासभा के संविधान की धार ९(क,ख) में चुनाव संबंधी जो उल्लेख हैं उनको समझ कर गहरार्इ से उन पर विचार करें। कार्यवाहक अध्यक्ष द्वारा चुनाव प्रक्रिया पर चिन्तन के लिए एक समिति का गठन करना चाहिए, इस हेतु सदन इस प्रस्ताव का समर्थन करे। इस बिन्दु पर पूर्व महामंत्री श्री केदार ।२३६०,।२३६० पण्ड्या ने आपत्ति लेकर अपनी बात रखी जिसका बिन्दुवार उत्तर कार्यवाहक अध्यक्ष श्री उदयसिह पण्ड्या ने देकर उन्हें सन्तुष्ट किया।

राजस्थान प्रान्त के महामंत्री श्री. व्ही.सी. व्यास ने कहा कि महासभा के इन्दौर स्थित केन्द्रीय कार्यालय से समय पर पत्रों के जवाब नही दिए जाते हैं और यदि कोर्इ उत्तर प्राप्त भी होता है तो उसकी भाषा अस्पष्ट और अनुत्तरीत जैसी होती है, वहां की कार्यविधि को दुरुस्त किया जावे। अन्त में श्री रघुनन्दन जी शर्मा, अध्यक्ष अ.भा. औदीच्य महासभा ने मुखरवाणी में अपना उद्बोधन देते हुए कहा कि श्री हेमशंकर जी दीक्षित अध्यक्ष राज. प्रान्त द्वारा कार्यकारिणी की बैठक को राजस्थान प्रान्त में योजित करने हेतु मेरे अनुरोध को स्वीकार कर भीलवाडा में आयोजित की उसके लिए धन्यवाद एवं आभार। इस बैठक के संबंध में कर्इ लोगों द्वारा चुनाव संबंधी अफवाह निरर्थक रूप से फैलार्इ गर्इ जो उचित नहीं थी। अब बीति ताहि बिसार दे, आगे की सुधि ले, के अनुसार मैं चाहता था कि इस बैठक में ११ जनवरी की घटना का जिक्र न हो किन्तु कोटा से प्रकाशित होने वाले औदीच्य गौरव, औदीच्य समाज में इसका उल्लेख करने के साथ अन्य सदस्यों ने यहां भी अपने विचार प्रकट किए। अब आगे से ऐसा न हो। समाज के प्रति कुछ समाजापयोगी कार्य करना आवश्यक है। हमें जाति का गौरव बढाना होगा। मैंने चुनाव के समय स्पष्ट रूप से कहा था कि यदि एक भी बा मेरा विरोध करता है तो मैं अध्यक्ष पद स्वीकार नहीं करूंगा। जबकि मेरी सहमति के बगैर मेरे नाम का उल्लेख होता रहा। आत्मा की आवाज, पर हर व्यक्ति को काम करना चाहिए। उज्जैन नगर में ही मैंने त्याग पत्र लिखकर श्री उदयसिह जी एवं महामंत्री श्री गोविन्द आचार्य को भेजा, उसे नहीं माना गया। श्री उदयसिह पण्ड्या, अध्यक्ष पद का निर्वाचन होने तक पूर्णरूपेण अध्यक्ष का कार्य करें और मेरे त्यागपत्र की पुष्टि कार्यकारिणी को करना चाहिए। मैं नैतिकता का हिमायती रहा हूँ। मुझे अब अध्यक्ष पद पर कार्य नहीं करना चाहिए। संवैधानिक द्टष्टि से चुनाव के लिए ६ माह की अवधि की पुष्टि कार्यकारिणी द्वारा करना आवश्यक है। हमारे यहां महासभा के प्रति आस्था और जनचेतना की भारी कमी है। सदस्यों में महासभा की गतिविधियां में भाग लेने के प्रति लगाव होना चाहिए। श्री उदयसिह जी के नेतृत्व में संगठन का कार्य मजबूती से होना चाहिए। आप औदीच्य बन्धु का अप्रैल २०१५ का अंक देखें कि घटनाओं का आपसी संयोग कैसे मिलता है। श्री नीरज जी ओझा के परदादा रायबहादुर श्री गौरीशंकर हीराचन्द जी ओझा, १९ अप्रैल १९३५ को पुष्कर में आयोजित महासभा के अधिवेशन के स्वागताध्यक्ष थे और ८० वर्ष के बाद १९ अप्रैल २०१५ को भीलवाडा में आयोजित कार्यकारिणी की बैठक हेतु उनके प्रपौत्र नीरज ओझा भीलवाडा में स्वागताध्यक्ष हैं। पहले लोग बुद्धिमत्ता से कार्य करते थे संकीर्णता नहीं थी। स्वस्थ नेतृत्व था। हमें विकृतियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। वर्ष १९३५ में बालविवाह रोकने के लिए काफी प्रयास किए गये थे। गीता में सतोगुण, रजोगुण एवं तमोगुण के बारे में स्पष्ट उल्लेख है। हमें सतोगुणी बनाना चाहिए। मैं मृत्युभोज का विरोधी हँू। इस बुरार्इ को दूर करना चाहिए। "मैं शोकाकुल परिवार में संवेदना प्रगट करने जाऊंॅगा, किन्तु भोजन नहीं करूंगा। ऐसा आदर्श उपस्थित करने वाले व्यक्ति का सम्मान होन चाहिए। कोटा से प्रकाशित औदीच्य गौरव में मैंने पढा कि हाल में विजयवाडा एवं तमिलनाडु में औदीच्य इकार्इ का गठन हुआ है। अन्य प्रान्तों के औदीच्य बन्धुओं को भी इसे अपनाना चाहिए। आपने म.प्र. इकार्इ के अध्यक्ष श्री प्रकाशजी दुबे जो स्वास्थ्य खराब होने के कारण उपस्थित नहीं हो सके थे उनके विचारों को भी सदन के सामने रखा। मैं यह चाहता हूं कि महासभा और औदीच्य बन्धु के लिए सदस्यता अभियान में तेजी लाना चाहिए।
कार्यकारिणी की बैठक के अन्त में समाज के सभी दिवंगतों को मौन श्रद्धांजली दी गर्इ। भोजनोपरान्त द्वितीय सत्र में राजस्थान प्रान्त के विभिन्न जिलों से पधारे जिलाध्यक्षों ने अपने जिले में चल रही महासभा की गतिविधियों एवं आने वाली समस्या पर चर्चा की। महामंत्री श्री व्ही.सी. व्यास द्वारा राजस्थान में बैंक के खाते खोलने में आ रही कठिनार्इ का समाधान करने का आग्रह किया। इस अवसर पर भीलवाडा औदीच्य संगठन द्वारा श्री रघुनन्दन जी शर्मा का सम्मान किया गया। सभी आगन्तुक अतिथियों को स्मृति चिह्न प्रदान कर सत्र समाप्त हुआ।
इस बैठक में राजस्थान प्रान्त के अतिरिक्त इन्दौर, उज्जैन, देवास, रतलाम आदि जिलों के कार्यकारिणी सदस्य भी उपस्थित थे। भीलवाडा औदीच्य महिला संगठन एवं युवा संगठन, व्यवस्था एवं सुनियोजित आयोजन के लिए बधार्इ के पात्र हैं।

मुख्य रूप से इस कार्यकारिणी की बैठक में उपस्थित सदस्यों ने ध्वनिमत से निम्न दो प्रस्तावों का अनुमोदन किया
(१) ११ जनवरी २०१५ को उज्जैन में आयोजित साधारण सभा की बैठक में ६ माह बाद चुनाव कराने के प्रस्ताव पर सदन की सहमति नहीं ली जा सकी थी, क्योंकि तत्समय अशोभनीय वातावरण उत्पन्न हो जाने से सभी सदस्य सदन से बाहर जा चुके थे। इस कारण आज १९ अप्रैल २०१५ को भीलवाडा में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में चुनाव हेतु बढार्इ गर्इ ६ माह की अवधि का अनुमोदन किया गया।
(२) राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा कार्यवाहक अध्यक्ष श्री उदयसिह पण्ड्या को महासभा के संविधान की धारा ९ के तहत कार्यवाही करने हेतु अधिकृत किया गया।

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